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Monday, 3 October 2016

शिवताण्डवस्तोत्रम्


शिवताण्डवस्तोत्रम् 




जटा टवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले, गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम् |
डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं, चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ||१||

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिम्प निर्झरी, विलो लवी चिवल्लरी विराजमान मूर्धनि |
धगद् धगद् धगज्ज्वलल् ललाट पट्ट पावके किशोर चन्द्र शेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ||२|| 

धरा धरेन्द्र नंदिनी विलास बन्धु बन्धुरस् फुरद् दिगन्त सन्तति प्रमोद मानमानसे | 
कृपा कटाक्ष धोरणी निरुद्ध दुर्धरापदि क्वचिद् दिगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ||३||

 लता भुजङ्ग पिङ्गलस् फुरत्फणा मणिप्रभा कदम्ब कुङ्कुमद्रवप् रलिप्तदिग्व धूमुखे |
मदान्ध सिन्धुरस् फुरत् त्वगुत्तरीयमे दुरे मनो विनोद मद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ||४|| 

सहस्र लोचनप्रभृत्य शेष लेखशेखर प्रसून धूलिधोरणी विधूस राङ्घ्रि पीठभूः | 
भुजङ्ग राजमालया निबद्ध जाटजूटक श्रियै चिराय जायतां चकोर बन्धुशेखरः ||५|| 

ललाट चत्वरज्वलद् धनञ्जयस्फुलिङ्गभा निपीत पञ्चसायकं नमन्निलिम्प नायकम् |
 सुधा मयूखले खया विराजमानशेखरं महाकपालिसम्पदे शिरोज टालमस्तु नः ||६||

 कराल भाल पट्टिका धगद् धगद् धगज्ज्वल द्धनञ्जयाहुती कृतप्रचण्ड पञ्चसायके | 
धरा धरेन्द्र नन्दिनी कुचाग्र चित्रपत्रक प्रकल्प नैक शिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम |||७|| 

नवीन मेघ मण्डली निरुद् धदुर् धरस्फुरत्- कुहू निशीथि नीतमः प्रबन्ध बद्ध कन्धरः | 
निलिम्प निर्झरी धरस् तनोतु कृत्ति सिन्धुरः कला निधान बन्धुरः श्रियं जगद् धुरंधरः ||८|| 

प्रफुल्ल नीलपङ्कज प्रपञ्च कालिम प्रभा- वलम्बि कण्ठकन्दली रुचिप्रबद्ध कन्धरम् | 
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छि दांध कच्छिदं तमंत कच्छिदं भजे ||९|| 

अखर्व सर्व मङ्गला कला कदंब मञ्जरी रस प्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम् |स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं गजान्त कान्ध कान्त कं तमन्त कान्त कं भजे ||१०|| 

जयत् वदभ्र विभ्रम भ्रमद् भुजङ्ग मश्वस – द्विनिर्ग मत् क्रमस्फुरत् कराल भाल हव्यवाट् |
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल  ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः ||११||

 स्पृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर्-गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः |
तृष्णारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समप्रवृत्तिकः ( समं प्रवर्तयन्मनः) कदा सदाशिवं भजे ||१२||

 कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन् विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरः स्थमञ्जलिं वहन् | 
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ||१३|| 

इदम् हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसंततम् | 

हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् ||१४||

पूजा वसान समये दशवक्त्र गीतं यः शंभु पूजन परं पठति प्रदोषे |
 तस्य स्थिरां रथगजेन्द्र तुरङ्ग युक्तां लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शंभुः ||१५||

इति श्रीरावण- कृतम् शिव- ताण्डव- स्तोत्रम् सम्पूर्णम्


॥  हर हर महादेव ॥ 

Sunday, 10 July 2016

The secrets of YOGA (basic)

योग करने के मौलिक रहस्य



योग एक ऐसी वैज्ञानिक प्रमाणिक व्यायाम पद्धति है।जिसके लिए न तो ज्यादा साधनों की जरुरत होती हैं और न ही अधिक खर्च करना पड़ता है। इसलिए पिछले कुछ सालों से योग की लोकप्रियता और इसके नियमित अभ्यास करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि योग करने के क्या लाभ है....

1. योगासन अमीर-गरीब, बूढ़े-जवान, सबल-निर्बल सभी स्त्री-पुरुष कर सकते हैं।

2. आसनों में जहां मांसपेशियों को तानने, सिकोडऩे और ऐंठने वाली क्रियाएं करनी पड़ती हैं, वहीं दूसरी ओर साथ-साथ तनाव-खिंचाव दूर करनेवाली क्रियाएं भी होती रहती हैं, जिससे शरीर की थकान मिट जाती है और आसनों से व्यय शक्ति वापस मिल जाती है। शरीर और मन को तरोताजा करने, उनकी खोई हुई शक्ति की पूर्ति कर देने और आध्यात्मिक लाभ की दृष्टि से भी योगासनों का अपना अलग महत्व है।

3. योगासनों से भीतरी ग्रंथियां अपना काम अच्छी तरह कर सकती हैं और युवावस्था बनाए रखने एवं वीर्य रक्षा में सहायक होती है।

4. योगासनों द्वारा पेट की भली-भांति सुचारु रूप से सफाई होती है और पाचन अंग पुष्ट होते हैं। पाचन-संस्थान में गड़बडिय़ां उत्पन्न नहीं होतीं।

5. योगासन मेरुदण्ड-रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाते हैं और व्यय हुई नाड़ी शक्ति की पूर्ति करते हैं।

6. योगासन पेशियों को शक्ति प्रदान करते हैं। इससे मोटापा घटता है और दुर्बल-पतला व्यक्ति तंदरुस्त होता है।

7. योगासन स्त्रियों की शरीर रचना के लिए विशेष अनुकूल हैं। वे उनमें सुन्दरता, सम्यक-विकास, सुघड़ता और गति, सौन्दर्य आदि के गुण उत्पन्न करते हैं।

8. योगासनों से बुद्धि की वृद्धि होती है और धारणा शक्ति को नई स्फूर्ति एवं ताजगी मिलती है। ऊपर उठने वाली प्रवृत्तियां जागृत होती हैं और आत्म-सुधार के प्रयत्न बढ़ जाते हैं।

9. योगासन स्त्रियों और पुरुषों को संयमी एवं आहार-विहार में मध्यम मार्ग का अनुकरण करने वाला बनाते हैं, मन और शरीर को स्थाई तथा सम्पूर्ण स्वास्थ्य, मिलता है।

10. योगासन श्वास- क्रिया का नियमन करते हैं, दिल और फेफड़ों को बल देते हैं, रक्त को शुद्ध करते हैं और मन में स्थिरता पैदा कर संकल्प शक्ति को बढ़ाते हैं।

11. योगासन शारीरिक स्वास्थ्य के लिए वरदान स्वरूप हैं क्योंकि इनमें शरीर के समस्त भागों पर प्रभाव पड़ता है, और वह अपने कार्य सुचारु रूप से करते हैं।

12. आसन रोग विकारों को नष्ट करते हैं, रोगों से रक्षा करते हैं, शरीर को निरोग, स्वस्थ और बलिष्ठ बनाए रखते हैं।

13. आसनों से नेत्रों की ज्योति बढ़ती है। आसनों का निरन्तर अभ्यास करने वाले को चश्में की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।

14. योगासन से शरीर के प्रत्येक अंग का व्यायाम होता है, जिससे शरीर पुष्ट, स्वस्थ एवं सुदृढ़ बनता है।


ये कुछ मौलिक लाभ है योग करने के जिसका उपभोग सभी को लेना चाहिए । योग के कुछ रहस्य और भी हैं परन्तु उसके लिए हमें मौलिक (basic) योग में दक्ष होना पड़ेगा। 
 मै जल्दी ही वो रहस्य को उजागर करूँगा तब तक आप स्वस्थ रहिये योग करिये 

Wednesday, 9 December 2015

indian ancient great poet.

ॐ नमः शिवायः

क्या ऐसा संभव है कि जब आप किताब को सीधा पढ़े तो
रामायण की कथा पढ़ी जाए और जब उसी किताब में लिखे
शब्दों को उल्टा करके पढ़े तो कृष्ण भागवत की कथा सुनाई दे।
जी हां, कांचीपुरम के 17वीं शती के कवि वेंकटाध्वरि रचित
ग्रन्थ राघवयादवीयम् ऐसा ही एक अद्भुत ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ
को ‘अनुलोम-विलोम काव्य’ भी कहा जाता है।
पूरे ग्रन्थ में केवल 30 श्लोक हैं। इन श्लोकों को सीधे-सीधे
पढ़ते जाएँ, तो रामकथा बनती है और विपरीत (उल्टा) क्रम में
पढ़ने पर कृष्णकथा। इस प्रकार हैं तो केवल 30 श्लोक, लेकिन
कृष्णकथा के भी 30 श्लोक जोड़ लिए जाएँ तो बनते हैं 60
श्लोक। पुस्तक के नाम से भी यह प्रदर्शित होता है, राघव
(राम) + यादव (कृष्ण) के चरित को बताने वाली गाथा है
राघवयादवीयम। उदाहरण के तौर पर पुस्तक का पहला श्लोक हैः

वंदेऽहं देवं तं श्रीतं रन्तारं कालं भासा यः ।
रामो रामाधीराप्यागो लीलामारायोध्ये वासे ॥ १॥

अर्थातः मैं उन भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम करता हूं जो
जिनके ह्रदय में सीताजी रहती है तथा जिन्होंने अपनी पत्नी
सीता के लिए सहयाद्री की पहाड़ियों से होते हुए लंका जाकर रावण का वध किया तथा वनवास पूरा कर अयोध्या वापिस लौटे।

विलोमम्
सेवाध्येयो रामालाली गोप्याराधी भारामोराः ।
यस्साभालंकारं तारं तं श्रीतं वन्देऽहं देवम् ॥ १॥

अर्थातः मैं रूक्मिणी तथा गोपियों के पूज्य भगवान श्रीकृष्ण के
चरणों में प्रणाम करता हूं जो सदा ही मां लक्ष्मी के साथ
विराजमान है तथा जिनकी शोभा समस्त जवाहरातों की शोभा हर लेती है।
राघवयादवीयम के ये 60 संस्कृत श्लोक इस प्रकार हैं

राघवयादवीयम् रामस्तोत्राणि
वंदेऽहं देवं तं श्रीतं रन्तारं कालं भासा यः ।
रामो रामाधीराप्यागो लीलामारायोध्ये वासे ॥ १॥
विलोमम्
सेवाध्येयो रामालाली गोप्याराधी भारामोराः ।
यस्साभालंकारं तारं तं श्रीतं वन्देऽहं देवम् ॥ १॥

साकेताख्या ज्यायामासीद्याविप्रादीप्तार्याधारा ।
पूराजीतादेवाद्याविश्वासाग्र्यासावाशारावा ॥ २॥
विलोमम्
वाराशावासाग्र्या साश्वाविद्यावादेताजीरापूः ।
राधार्यप्ता दीप्राविद्यासीमायाज्याख्याताकेसा ॥ २॥

कामभारस्स्थलसारश्रीसौधासौघनवापिका ।
सारसारवपीनासरागाकारसुभूरुभूः ॥ ३॥
विलोमम्
भूरिभूसुरकागारासनापीवरसारसा ।
कापिवानघसौधासौ श्रीरसालस्थभामका ॥ ३॥

रामधामसमानेनमागोरोधनमासताम् ।
नामहामक्षररसं ताराभास्तु न वेद या ॥ ४॥
विलोमम्
यादवेनस्तुभारातासंररक्षमहामनाः ।
तां समानधरोगोमाननेमासमधामराः ॥ ४॥

यन् गाधेयो योगी रागी वैताने सौम्ये सौख्येसौ ।
तं ख्यातं शीतं स्फीतं भीमानामाश्रीहाता त्रातम् ॥ ५॥
विलोमम्
तं त्राताहाश्रीमानामाभीतं स्फीत्तं शीतं ख्यातं ।
सौख्ये सौम्येसौ नेता वै गीरागीयो योधेगायन् ॥ ५॥

मारमं सुकुमाराभं रसाजापनृताश्रितं ।
काविरामदलापागोसमावामतरानते ॥ ६॥
विलोमम्
तेन रातमवामास गोपालादमराविका ।
तं श्रितानृपजासारंभ रामाकुसुमं रमा ॥ ६॥

रामनामा सदा खेदभावे दया-वानतापीनतेजारिपावनते ।
कादिमोदासहातास्वभासारसा-मेसुगोरेणुकागात्रजे भूरुमे ॥ ७॥
विलोमम्
मेरुभूजेत्रगाकाणुरेगोसुमे-सारसा भास्वताहासदामोदिका ।
तेन वा पारिजातेन पीता नवायादवे भादखेदासमानामरा ॥ ७॥

सारसासमधाताक्षिभूम्नाधामसु सीतया ।
साध्वसाविहरेमेक्षेम्यरमासुरसारहा ॥ ८॥
विलोमम्
हारसारसुमारम्यक्षेमेरेहविसाध्वसा ।
यातसीसुमधाम्नाभूक्षिताधामससारसा ॥ ८॥

सागसाभरतायेभमाभातामन्युमत्तया ।
सात्रमध्यमयातापेपोतायाधिगतारसा ॥ ९॥
विलोमम्
सारतागधियातापोपेतायामध्यमत्रसा ।
यात्तमन्युमताभामा भयेतारभसागसा ॥ ९॥

तानवादपकोमाभारामेकाननदाससा ।
यालतावृद्धसेवाकाकैकेयीमहदाहह ॥ १०॥
विलोमम्
हहदाहमयीकेकैकावासेद्ध्वृतालया ।
सासदाननकामेराभामाकोपदवानता ॥ १०॥

वरमानदसत्यासह्रीतपित्रादरादहो ।
भास्वरस्थिरधीरोपहारोरावनगाम्यसौ ॥ ११॥
विलोमम्
सौम्यगानवरारोहापरोधीरस्स्थिरस्वभाः ।
होदरादत्रापितह्रीसत्यासदनमारवा ॥ ११॥

यानयानघधीतादा रसायास्तनयादवे ।
सागताहिवियाताह्रीसतापानकिलोनभा ॥ १२॥
विलोमम्
भानलोकिनपातासह्रीतायाविहितागसा ।
वेदयानस्तयासारदाताधीघनयानया ॥ १२॥

रागिराधुतिगर्वादारदाहोमहसाहह ।
यानगातभरद्वाजमायासीदमगाहिनः ॥ १३॥
विलोमम्
नोहिगामदसीयामाजद्वारभतगानया ।
हह साहमहोदारदार्वागतिधुरागिरा ॥ १३॥

यातुराजिदभाभारं द्यां वमारुतगन्धगम् ।
सोगमारपदं यक्षतुंगाभोनघयात्रया ॥ १४॥
विलोमम्
यात्रयाघनभोगातुं क्षयदं परमागसः ।
गन्धगंतरुमावद्यं रंभाभादजिरा तु या ॥ १४॥

दण्डकां प्रदमोराजाल्याहतामयकारिहा ।
ससमानवतानेनोभोग्याभोनतदासन ॥ १५॥
विलोमम्
नसदातनभोग्याभो नोनेतावनमास सः ।
हारिकायमताहल्याजारामोदप्रकाण्डदम् ॥ १५॥

सोरमारदनज्ञानोवेदेराकण्ठकुंभजम् ।
तं द्रुसारपटोनागानानादोषविराधहा ॥ १६॥
विलोमम्
हाधराविषदोनानागानाटोपरसाद्रुतम् ।
जम्भकुण्ठकरादेवेनोज्ञानदरमारसः ॥ १६॥

सागमाकरपाताहाकंकेनावनतोहिसः ।
न समानर्दमारामालंकाराजस्वसा रतम् ॥ १७॥
विलोमम्
तं रसास्वजराकालंमारामार्दनमासन ।
सहितोनवनाकेकं हातापारकमागसा ॥ १७॥

तां स गोरमदोश्रीदो विग्रामसदरोतत ।
वैरमासपलाहारा विनासा रविवंशके ॥ १८॥
विलोमम्
केशवं विरसानाविराहालापसमारवैः ।
ततरोदसमग्राविदोश्रीदोमरगोसताम् ॥ १८॥

गोद्युगोमस्वमायोभूदश्रीगखरसेनया ।
सहसाहवधारोविकलोराजदरातिहा ॥ १९॥
विलोमम्
हातिरादजरालोकविरोधावहसाहस ।
यानसेरखगश्रीद भूयोमास्वमगोद्युगः ॥ १९॥

हतपापचयेहेयो लंकेशोयमसारधीः ।
राजिराविरतेरापोहाहाहंग्रहमारघः ॥ २०॥
विलोमम्
घोरमाहग्रहंहाहापोरातेरविराजिराः ।
धीरसामयशोकेलं यो हेये च पपात ह ॥ २०॥

ताटकेयलवादेनोहारीहारिगिरासमः ।
हासहायजनासीतानाप्तेनादमनाभुवि ॥ २१॥
विलोमम्
विभुनामदनाप्तेनातासीनाजयहासहा ।
ससरागिरिहारीहानोदेवालयकेटता ॥ २१॥

भारमाकुदशाकेनाशराधीकुहकेनहा ।
चारुधीवनपालोक्या वैदेहीमहिताहृता ॥ २२॥
विलोमम्
ताहृताहिमहीदेव्यैक्यालोपानवधीरुचा ।
हानकेहकुधीराशानाकेशादकुमारभाः ॥ २२॥

हारितोयदभोरामावियोगेनघवायुजः ।
तंरुमामहितोपेतामोदोसारज्ञरामयः ॥ २३॥
विलोमम्
योमराज्ञरसादोमोतापेतोहिममारुतम् ।
जोयुवाघनगेयोविमाराभोदयतोरिहा ॥ २३॥

भानुभानुतभावामासदामोदपरोहतं ।
तंहतामरसाभक्षोतिराताकृतवासविम् ॥ २४॥
विलोमम्
विंसवातकृतारातिक्षोभासारमताहतं ।
तं हरोपदमोदासमावाभातनुभानुभाः ॥ २४॥

हंसजारुद्धबलजापरोदारसुभाजिनि ।
राजिरावणरक्षोरविघातायरमारयम् ॥ २५॥
विलोमम्
यं रमारयताघाविरक्षोरणवराजिरा ।
निजभासुरदारोपजालबद्धरुजासहम् ॥ २५॥

सागरातिगमाभातिनाकेशोसुरमासहः ।
तंसमारुतजंगोप्ताभादासाद्यगतोगजम् ॥ २६॥
विलोमम्
जंगतोगद्यसादाभाप्तागोजंतरुमासतं ।
हस्समारसुशोकेनातिभामागतिरागसा ॥ २६॥

वीरवानरसेनस्य त्राताभादवता हि सः ।
तोयधावरिगोयादस्ययतोनवसेतुना ॥ २७॥
विलोमम्
नातुसेवनतोयस्यदयागोरिवधायतः ।
सहितावदभातात्रास्यनसेरनवारवी ॥ २७॥

हारिसाहसलंकेनासुभेदीमहितोहिसः ।
चारुभूतनुजोरामोरमाराधयदार्तिहा ॥ २८॥
विलोमम्
हार्तिदायधरामारमोराजोनुतभूरुचा ।
सहितोहिमदीभेसुनाकेलंसहसारिहा ॥ २८॥

नालिकेरसुभाकारागारासौसुरसापिका ।
रावणारिक्षमेरापूराभेजे हि ननामुना ॥ २९॥
विलोमम्
नामुनानहिजेभेरापूरामेक्षरिणावरा ।
कापिसारसुसौरागाराकाभासुरकेलिना ॥ २९॥

साग्र्यतामरसागारामक्षामाघनभारगौः ॥
निजदेपरजित्यास श्रीरामे सुगराजभा ॥ ३०॥
विलोमम्
भाजरागसुमेराश्रीसत्याजिरपदेजनि ।
गौरभानघमाक्षामरागासारमताग्र्यसा ॥ ३०॥

॥ इति श्रीवेङ्कटाध्वरि कृतं श्री राघव यादवीयं समाप्तम् ॥
           
          🌷जय श्री राधे🌹

Sunday, 6 December 2015

Great importance of Shard Purnima according to veda.

🌝 शरद-पूर्णिमा की खीर
🔔भगवान ने भी कहा है,'पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः।।'
🐚'रसस्वरूप अर्थात् अमृतमय चन्द्रमा होकर सम्पूर्ण औषधियों को अर्थात् वनस्पतियों को पुष्ट करता हूं।' (गीताः15.13)
  🍁हमारे शास्त्रों में अनेक मान्यताएं है जिनके अनुरूप शरद पूर्णिमा की खीर का विशेष महत्व है ।
🌼शरद पूर्णिमा का अध्यात्मिक महत्व :-
      हिंदू संस्कृति में आश्रि्वन मास की पूर्णिमा का अपना विशेष महत्व है। इसे शरद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। शरद पूर्णिमा को आनंद व उल्लास का पर्व माना जाता है। इस पर्व का धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व भी है।
ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात्रि में भगवान शकर एवं माँ पार्वती कैलाश पर्वत पर रमण करते हैं, तथा संपूर्ण कैलाश पर्वत पर चंद्रमा जगमगा जाता है। भगवान कृष्ण ने भी शरद पूर्णिमा को रास-लीला की थी, तथा मथुरा-वृंदावन सहित अनेक स्थानों पर इस रात को रास-लीलाओं का आयोजन किया जाता है। लोग शरद पूर्णिमा को व्रत भी रखते हैं, तथा शास्त्रों में इसे कौमुदी व्रत भी कहा गया है।
💥लंकाधिपति रावण शरद पूर्णिमा की रात किरणों को दर्पण के माध्यम से अपनी नाभि पर ग्रहण करता था। इस प्रक्रिया से उसे पुनर्योवन शक्ति प्राप्त होती थी। चांदनी रात में 10 से मध्यरात्रि 12 बजे के बीच कम वस्त्रों में घूमने वाले व्यक्ति को ऊर्जा प्राप्त होती है। सोमचक्र, नक्षत्रीय चक्र और आश्विन के त्रिकोण के कारण शरद ऋतु से ऊर्जा का संग्रह होता है और बसंत में निग्रह होता है।
मान्यताएं एवं वैज्ञानिक कारण :-
पूर्णिमा को चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है
जिससे चंद्रमा के प्रकाश की किरणें पृथ्वी पर स्वास्थ्य की बौछारे करती हैं। इस दिन चंद्रमा की किरणों में विशेष प्रकार के लवण व विटामिन होते हैं। कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से नाग का विष भी अमृत बन जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि प्रकृति इस दिन धरती पर अमृत वर्षा करती है।
😊अध्ययन के अनुसार दुग्ध में लैक्टिक अम्ल और अमृत तत्व होता है। यह तत्व किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया और आसान हो जाती है। इसी कारण ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया है। यह परंपरा विज्ञान पर आधारित है।
🍚शोध के अनुसार खीर को चांदी के पात्र में बनाना चाहिए। चांदी में प्रतिरोधकता अधिक होती है। इससे विषाणु दूर रहते हैं। चांदी पात्र की अनुपस्थिति में मिट्टी की हांड़ी में खीर बनाना चाहिए । इस खीर में हल्दी का उपयोग निषिद्ध है। प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 30 मिनट तक शरद पूर्णिमा का स्नान करना चाहिए। रात्रि 10 से 12 बजे तक का समय उपयुक्त रहता है।
🌟चेहरे पर काति आती है :-
शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा का पूजन कर भोग लगाया जाता है, जिससे आयु बढ़ती है व चेहरे पर  कान्ति आती है ,  एवं शरीर स्वस्थ रहता है। शरद पूर्णिमा की मनमोहक सुनहरी रात में वैद्यों द्वारा जड़ी बूटियों से औषधि का निर्माण किया जाता है। माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात को तैयार की गई औषधि अचूक रामबाण होती है। चंद्रमा की रात में खुले मुंह के बर्तन में खीर पकाई जाती है जिसमें चंद्र किरणों का समावेश होने से अमृत रूपी यह खीर अनेक रोगों के लिए दवा का काम करती है। विशेषकर श्वास व दमा के रोगियों को पीपल वृक्ष की छाल दूध में मिलाकर इसे धीमी आग पर किरणों के प्रकाश में तैयार कर खीर खिलाई जाती है जिससे दमा रोगी लाभांवित होते हे।
चंद्र किरणों में तैयार स्वास्थ्य खीर :-
👉√ इसी प्रकार वैद्य लोग विभिन्न प्रकार के रोगियों के लिए इस रात चंद्र किरणों में खीर तैयार करते है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ धीमी आच पर चंद्र किरणों में खीर पकानी रखकर विविध प्रकार के खेल खेलते है एवं बौद्धिक के द्वारा ज्ञान बढ़ाते है व रात को बारह बजे के पश्चात खीर के रूप में प्रसाद ग्रहण करते हैं। व्रत रखने वाले लोग चंद्र किरणों में पकाई गई खीर को अगले रोज प्रसाद के रूप में ग्रहण कर अपना व्रत खोलते है।
सौंदर्य व छटा मन हर्षित करने वाली शरद पूर्णिमा की रात को नौका विहार करना, नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है। शरद पूर्णिमा की रात प्रकृति का सौंदर्य व छटा मन को हर्षित करने वाली होती है। नाना प्रकार के पुष्पों की सुगंध इस रात में बढ़ जाती है, जो मन को लुभाती है वहीं तन को भी मुग्ध करती है। यह पर्व स्वास्थ्य, सौंदर्य व उल्लास बढ़ाने वाला माना गया है।
😋इससे रोगी को सांस और कफ दोष के कारण होने वाली तकलीफों में काफी लाभ मिलता है I रात्रि जागरण के महत्व के कारण ही इसे जागृति पूर्णिमा भी कहा जाता है , इसका एक कारण रात्रि में स्वाभाविक कफ के प्रकोप को जागरण से कम करना हैI इस खीर को मधुमेह से पीड़ित रोगी भी ले सकते हैं, बस इसमें मिश्री की जगह प्राकृतिक स्वीटनर स्टीविया की पत्तियों को मिला दें I
🌴खीर खाओ मलेरिया भगाओ :-
हमारी हर प्राचीन परंपरा में वैज्ञानिकता का दर्शन होता हैं । अज्ञानता का नहीं......
हम सब जानते है की मच्छर काटने से मलेरिया होता है वर्ष मे कम से कम 700-800 बार तो मच्छर काटते ही होंगे अर्थात 70 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते लाख बार मच्छर काट लेते होंगे । लेकिन अधिकांश लोगो को जीवनभर में एक दो बार ही मलेरिया होता है । सारांश यह है की मच्छर के काटने से मलेरिया होता है, यह 1% ही सही है ।
⛅वर्षा ऋतु के बाद जब शरद ऋतु आती है तो आसमान में बादल व धूल के न होने से कडक धूप पड़ती है। जिससे शरीर में पित्त कुपित होता है । इस समय गड्ढो आदि मे जमा पानी के कारण बहुत बड़ी मात्रा मे मच्छर पैदा होते है इससे मलेरिया होने का खतरा सबसे अधिक होता है ।
🌙आप जानते होंगे की शरद ऋतु के प्रारम्भ में दिन थोड़े गर्म और रातें शीतल हो जाया करती हैं I आयुर्वेद अनुसार यह पित्त दोष के प्रकोप का काल माना जाता है और मधुर तिक्त कषाय रस पित्त दोष का शमन करते हैं।
मलेरिया के लिए औषधीय खीर :-
🐯मलेरिया का असर पित्त के बढ़ने पर अधिक होता है । शरद पूर्णिमा को देसी गाय के दूध में दशमूल क्वाथ, सौंठ,काली मिर्च, वासा, अर्जुन की छाल चूर्ण, तालिश पत्र चूर्ण, वंशलोचन, बड़ी इलायची, पिप्पली इन सबको आवश्यक मात्रा में मिश्री मिलाकर पकायें और खीर बना लें I खीर में ऊपर से शहद और तुलसी पत्र मिला दें ,अब इस खीर को ताम्बे के साफ़ बर्तन में रातभर पूर्णिमा की चांदनी रात में खुले आसमान के नीचे ऊपर से जालीनुमा ढक्कन से ढक कर छोड़ दें और अपने घर की छत पर बैठ कर चंद्रमा को अर्घ देकर,अब इस खीर को रात्रि जागरण कर रहे दमे के रोगी को प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त (4-6 बजे प्रातः) सेवन कराएं I
📺लेकिन यहाँ ऐसे विज्ञापनो की कमी नहीं है, जो कहते है की एक भी मच्छर ‘डेंजरस’ है, हिट लाओगे तो एक भी मच्छर नहीं बचेगा। अब ऐसे विज्ञापनो के बहकावे मे आकर करोड़ो लोग इस मच्छर बाजार मे अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो जाते है । सभी जानते है बैक्टीरिया बिना उपयुक्त वातावरण के नहीं पनप सकते । जैसे दूध मे दही डालने मात्र से दही नहीं बनाता, दूध हल्का गरम होना चाहिए। उसे ढककर गरम वातावरण मे रखना होता है । बार बार हिलाने से भी दही नहीं जमता । ऐसे ही मलेरिया के बैक्टीरिया को जब पित्त का वातावरण मिलता है, तभी वह 4 दिन में पूरे शरीर में फैलता है, नहीं तो थोड़े समय में समाप्त हो जाता है । इतने सारे प्रयासो के बाद भी मच्छर और रोगवाहक सूक्ष्म कीट नहीं काटेंगे यह हमारे हाथ में नहीं । लेकिन पित्त को नियंत्रित रखना तो हमारे हाथ में है। अब हमारी परम्पराओं का चमत्कार देखिये जिन्हे अल्पज्ञानी, दक़ियानूसी, और पिछड़ेपन की सोच करके षड्यंत्र फैलाया जाता है।
😡खीर खाने से पित्त का शमन होता है । शरद में ही पितृ पक्ष (श्राद्ध) आता है पितरों का मुख्य भोजन है खीर । इस दौरान 5-7 बार खीर खाना हो जाता है । इसके बाद शरद पुर्णिमा को रातभर चाँदनी के नीचे चाँदी के पात्र में रखी खीर सुबह खाई जाती है (चाँदी का पात्र न हो तो चाँदी का चम्मच खीर मे डाल दे, लेकिन बर्तन मिट्टी, काँसा या पीतल का हो। क्योंकि स्टील जहर और एल्यूमिनियम, प्लास्टिक, चीनी मिट्टी महा-जहर है)
यह खीर विशेष ठंडक पहुंचाती है । गाय के दूध की हो तो अति उत्तम, विशेष गुणकारी (आयुर्वेद मे घी से अर्थात गौ घी और दूध गौ का) इससे मलेरिया होने की संभावना नहीं के बराबर हो जाती है ।
👳ध्यान रहे : इस ऋतु में बनाई खीर में केसर और में वों का प्रयोग न करे । ये गर्म प्रवृत्ति के होने से पित्त बढ़ा सकते है। सिर्फ इलायची डाले ।
👪शरद पूर्णिमा पर व्रत कथा :-
शरद पूर्णिमा से संबंधित व्रत कथा इस प्रकार है। एक साहूकार था। उसके दो पुत्रिया थीं, उनमें से एक शरद पूर्णिमा का व्रत रखती थीं व दूसरी व्रत को अधूरा छोड़ देती थीं। परिणामस्वरूप दूसरी के जो संतान होती थी वह मर जाया करती थी। इससे दुखी होकर उसने पंडितों से इसका कारण जानना चाहा तो मालूम हुआ कि व्रत पूरा न करने की वजह से ऐसा होता है। इसके बाद वह पूरा व्रत करने लगी किंतु फिर भी लड़का होने के बाद वह मर गया तो वह अपनी बहन को बुला लाई। उसकी साड़ी को छूते ही मृतक पुन: जीवित हो गया। इससे उसके मन में व्रत के प्रति स्नेह हुआ व आस्था बढ़ी। इसके बाद शरद पूर्णिमा के व्रत का महत्व बढ़ गया ओर इसी कारण से इस व्रत को संतान सुख देने वाला भी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को जो औरत गर्भ धारण करती है, वह निश्चित रूप से प्रतिभाशाली, स्वस्थ चंद्र जैसी काति वाले पुत्र को जन्म देती है |

Tuesday, 30 June 2015

All health-tonics like Boost, Horlicks, Bournvita etc are fake

कुछ विदेशी कंपनिया हमारे देश में हेल्थ टोनिक बेचते है जैसे Boost , Horlicks , Protienx , Bournvita , Complan , Moltova और वैज्ञानिको डोक्टोरो का कहना है एक भी टोनिक हेल्थ नही देता किउंकि उनमे जो कुछ मिलाया जाता है उसमे कोई ऐसे चिस्नेही है जो बच्चे को हेल्थ देगा | गौर करने वाली बात ये है के सभी को Food Suppliment बोल के बेचा जाता है मतलब खाना खाने के बाद ये लेना है |

 राजीव भाई के अनुसार इनमे मिलाई जाती है गेरू का आटा, जव का आटा , थोड़ा चने का आटा , मुमफली की खली, तिल की खली इत्यादि | ये सब चीस अगर बाज़ार से खरीद कर बनायीं जाये तोह एक किलो हेल्थ टोनिक बनाने में ४८ रूपए खर्च होता है मगर ये सब कंपनिया एक किलो १८० से ३८० रूपए में बेचती है | वैज्ञानिको का कहना है के १ किलो हेल्थ टोनिक खाने से उतनीही ताकत मिलेगी जितने २५ ग्राम मुमफली या चने को गुड़ के साथ खाने में मिलता है | ये विदेशी कंपनिया ५००० करोड़ रूपया हर साल लूटति है imotional blackmailing के विज्ञापन देके |

Friday, 26 June 2015

Treatment of cancer (hindi version) in details.

राजीव भाई की एक छोटी सी विनती है याद रखना के … 
" कैंसर के patient को कैंसर से death नही होती है, जो treatment उसे दिया जाता है उससे death सबसे अधिक होती है " ।
 माने कैंसर से ज्यादा खतरनाक कैंसर का treatment है । Treatment कैसा है ? ?आप सभी जानते है .. Chemotherapy दे दिया, Radiotherapy दे दिया, Cobalt-therapy दे दिया ।

पूरी post नहीं पढ़ सकते यहाँ click करें !
https://www.youtube.com/watch?v=cGyXitZJyBw

इसमें क्या होता है के शारीर का जो प्रतिरक्षक शक्ति है Resistance power ! वो बिलकुल ख़तम हो जाती है । जब Chemotherapy दिए जाते है तो डाक्टर ये बोलते है की हम कैंसर के सेल को मारना चाहते है लेकिन होता क्या है अच्छे सेल भी उसी के साथ मर जाते है । राजीव भाई के पास कोई भी रोगी जो आया Chemotherapy लेने के बाद राजीव भाई उसे बचा नही पाए । लेकिन इसका उल्टा भी रिकॉर्ड है .. राजीव भाई के पास बिना Chemotherapy लिए हुए कोई भी रोगी आया Second & third Stage के cancer तक वो एक भी नही मर पाया !

मतलब क्या है Treatment लेने मे जो खर्च आपने कर दिया वो तो गया ही और रोगी भी आपके हाथ से गया । डॉक्टर आपको भूल-भुलैया में रखता है अभी 6 महीने में ठीक हो जायेगा 8 महीने में ठीक हो जायेगा लेकिन अंत में वो मर ही जाता है , कभी हुआ नही है के Chemotherapy लेने के बाद कोई बच पाया हो । आपके घर परिवार में अगर किसी को कैंसर हो जाये तो ज्यादा खर्चा मत करिए कियों की जो खर्च आप करेंगे उससे मरीज का तो भला नही होगा उसको इतना कष्ट होता है की आप कल्पना नही कर सकते ।

उसको जो injections दिए जाते है, जो Tablets खिलाई जाती है, उसको जो Chemotherapy दी जाती है उससे सारे बाल उड़ जाते है, भ्रू के बाल उड़ जाते है, चेहरा इतना डरावना लगता है के पहचान में नही आता ये अपना ही आदमी है? इतना कष्ट क्यों दे रहे हो उसको ? सिर्फ इसलिए के आपको एक अहंकार है के आपके पास बहुत पैसा है तो Treatment कराके ही मानुगा ! होता ही नही है वो,

और आप अपनी आस पड़ोस की बाते ज्यादा मत सुनिए क्योंकि आजकल हमारे Relatives बहुत Emotionally Exploit करते है । घर में किसीको गंभीर बीमारी हो गयी तो जो रिश्तेदार है वो पहले आके कहते है ' अरे All India नही ले जा रहे हो? PGI नही ले जा रहे हो ? Tata Institute बम्बई नही ले जा रहे हो ? आप कहोगे नही ले जा रहा हूँ मेरे घर में ही चिकित्सा .... अरे तुम बड़े कंजूस आदमी हो बाप के लिए इतना भी नही कर सकते माँ के लिए इतना नही कर सकते " । ये बहुत खतरनाक लोग होते है !!

हो सकता है कई बार वो Innocently कहते हो, उनका intention ख़राब नही होता हो लेकिन उनको Knowledge कुछ भी नही है, बिना Knowledge के वो suggestions पे suggestions देते जाते है और कई बार अच्छा खासा पढ़ा लिखा आदमी फंसता है उसी में .. रोगी को भी गवाता है पैसा भी जाता है ।

कैंसर के लिए क्या करे ? हमारे घर में कैंसर के लिए एक बहुत अच्छी दावा है ..अब डॉक्टर ने मान लिया है पहले तो वे मानते भी नही थे; एक ही दुनिया में दावा है Anti-Cancerous उसका नाम है " हल्दी " । हल्दी कैंसर ठीक करने की ताकत रखती है ! कैसे ताकत रखती है वो जान लीजिये हल्दी में एक केमिकल है उसका नाम है कर्कुमिन (Carcumin) और ये ही कैंसर cells को मार सकता है बाकि कोई केमिकल बना नही दुनिया में और ये भी आदमी ने नही भगवान ने बनाया है ।

हल्दी जैसा ही कर्कुमिन और एक चीज में है वो है देशी गाय के मूत्र में । गोमूत्र माने देशी गाय के शारीर से निकला हुआ सीधा-सीधा मूत्र जिसे सूती के आट परत की कपड़ो से छान कर लिया गया हो । तो देशी गाय का मूत्र अगर आपको मिल जाये और हल्दी आपके पास हो तो आप कैंसर का इलाज आसानी से कर पायेंगे ।
(देशी गाय की पहचान उसकी पीठ पर हंप होता है )

अब देशी गाय का मूत्र आधा कप और आधा चम्मच हल्दी दोनों मिलाके गरम करना जिससे उबाल आ जाये फिर उसको ठंडा कर लेना । Room Temperature में आने के बाद रोगी को चाय की तरहा पिलाना है .. चुस्किया ले ले के सिप सिप कर कर । एक और आयुर्वेदिक दावा है पुनर्नवा जिसको अगर आधा चम्मच इसमें मिलायेंगे तो और अच्छा result आयेगा । ये Complementary है जो आयुर्वेद के दुकान में पाउडर या छोटे छोटे पीसेस में मिलती है ।

याद रखें इस दावा में सिर्फ देशी गाय का मूत्र ही काम में आता है विदेशी जर्सी का मूत्र कुछ काम नही आता । और जो देशी गाय काले रंग की हो उसका मूत्र सबसे अच्छा परिणाम देता है इन सब में । इस दवा को (देशी गाय की मूत्र, हल्दी, पुनर्नवा ) सही अनुपात में मिलाके उबालकर ठंडा करके कांच की पात्र में स्टोर करके रखिये पर बोतल को कभी फ्रिज में मत रखिये, धुप में मत रखिये । ये दावा कैंसर के सेकंड स्टेज में और कभी कभी थर्ड स्टेज में भी बहुत अच्छे परिणाम देती है

जब स्टेज थर्ड क्रोस करके फोर्थ में पहुँच गया हो तब रिजल्ट में प्रॉब्लम आती है । और अगर अपने किसी रोगी को Chemotherapy बैगेरा दे दिया तो फिर इसका कोई असर नही आता ! कितना भी पिलादो कोई रिजल्ट नही आता, रोगी मरता ही है । आप अगर किसी रोगी को ये दावा दे रहे है तो उसे पूछ लीजिये जान लीजिये कहीं Chemotherapy शुरू तो नही हो गयी ? अगर शुरू हो गयी है तो आप उसमे हाथ मत डालिए, जैसा डॉक्टर करता है करने दीजिये, आप भगवान से प्रार्थना कीजिये उसके लिए .. इतना ही करे ।

और अगर Chemotherapy स्टार्ट नही हुई है और उसने कोई अलोप्यथी treatment शुरू नही किया तो आप देखेंगे इसके Miraculous (चमत्कारिक रिजल्ट आते है । ये सारी दवाई काम करती है बॉडी के resistance पर, हमारी जो vitality है उसको improve करता है, हल्दी को छोड़ कर गोमूत्र और पुनर्नवा शारीर के vitality को improve करती है और vitality improve होने के बाद कैंसर cells को control करते है ।

तो कैंसर के लिए आप अपने जीवन में इस तरह से काम कर सकते है; इसके इलावा भी बहुत सारी मेडिसिन्स है जो थोड़ी complicated है वो कोई बहुत अच्छा डॉक्टर या वैद्य उसको हंडल करे तभी होगा आपसे अपने घर में नही होगा । इसमें एक सावधानी रखनी है के गाय के मूत्र लेते समय वो गर्भवती नही होनी चाहिए। गाय की जो बछड़ी है जो माँ नही बनी है उसका मूत्र आप कभी भी use कर सकते है।

ये तो बात हुई कैंसर के चिकित्सा की, पर जिन्दगी में कैंसर हो ही न ये और भी अच्छा है जानना । तो जिन्दगी में आपको कभी कैंसर न हो उसके लिए एक चीज याद रखिये के, हमेशा जो खाना खाए उसमे डालडा घी (refine oil ) तो नही है ? उसमे refined oil तो नही है ? हमेशा शुद्ध तेल खाये अर्थात सरसों ,नारियल ,मूँगफली का तेल खाने मे प्रयोग करें ! और घी अगर खाना है तो देशी गाय का घी खाएं ! गाय का देश घी नहीं !

ये देख लीजिये, दूसरा जो भी खाना खा रहे है उसमे रेशेदार हिस्सा जादा होना चाहिए जैसे छिल्केवाली डाले, छिल्केवाली सब्जिया खा रहे है , चावल भी छिल्केवाली खा रहे है तो बिलकुल निश्चिन्त रहिये कैंसर होने का कोई चान्स नही है ।

और कैंसर के सबसे बड़े कारणों में से दो तीन कारण है, एक तो कारण है तम्बाकू, दूसरा है बीड़ी और सिगरेट और गुटका ये चार चीजो को तो कभी भी हाथ मत लगाइए क्योंकि कैंसर के maximum cases इन्ही के कारन है पुरे देश में ।
कैंसर के बारे में सारी दुनिया एक ही बात कहती है चाहे वो डॉक्टर हो, experts हो, Scientist हो के इससे बचाओ ही इसका उपाय है ।

महिलाओं को आजकल बहुत कैंसर है uterus में गर्भाशय में, स्तनों में और ये काफी तेजी से बड़ रहा है .. Tumour होता है फिर कैंसर में convert हो जाता है । तो माताओं को बहनों को क्या करना चाहिए जिससे जिन्दगी में कभी Tumour न आये ? आपके लिए सबसे अच्छा prevention है की जैसे ही आपको आपके शारीर के किसी भी हिस्से में unwanted growth (रसोली, गांठ) का पता चले तो जल्द ही आप सावधान हो जाइये । हलाकि सभी गांठ और सभी रसोली कैंसर नही होती है 2-3% ही कैंसर में convert होती है

लेकिन आपको सावधान होना तो पड़ेगा । माताओं को अगर कहीं भी गांठ या रसोली हो गयी जो non-cancerous है तो जल्दी से जल्दी इसे गलाना और घोल देने का दुनिया में सबसे अछि दावा है " चुना " । चुन वोही जो पान में खाया जाता है, जो पोताई में इस्तेमाल होता है ; पानवाले की दुकान से चुना ले आइये उस चुने को कनक के दाने के बराबर रोज खाइये; इसको खाने का तरीका है पानी में घोल के पानी पी लीजिये, दही में घोल के दही पी लीजिये, लस्सी में घोल के लस्सी पी लीजिये, डाल में मिलाके दाल खा लीजिये, सब्जी में डाल के सब्जी खा लीजिये । पर ध्यान रहे पथरी के रोगी के लिए चुना बर्जित है ।

पूरी post पढ़ने के लिए बहुत बहुत आभार !

यहाँ जरूर click करें !

https://www.youtube.com/watch?v=cGyXitZJyBw

share भी जरूर करे क्या पता आपका एक share किसी
को जिंदगी दे दे !

वन्देमातरम ।।

Monday, 18 May 2015

Vedic Maths Tricks

Vedic Maths Tricks

1. Is it divisible by four?

This little math trick will show you whether
a number is divisible by four or not.
So, this is how it works.
Let's look at 1234 
Does 4 divide evenly into 1234?
For 4 to divide into any number we have
to make sure that the last number is even
If it is an odd number, there is no way it will go in evenly.
So, for example, 4 will not go evenly into 1233 or 1235
Now we know that for 4 to divide evenly into any
number the number has to end with an even number.
Back to the question...
4 into 1234, the solution:
Take the last number and add it to 2 times the second last number
If 4 goes evenly into this number then you know 
that 4 will go evenly into the whole number.
So
4 + (2 X 3) = 10
4 goes into 10 two times with a remainder of 2 so it does not go in evenly.
Therefore 4 into 1234 does not go in completely.
Let's try 4 into 3436546
So, from our example, take the last number, 6 and add it to
two times the penultimate number, 4
6 + (2 X 4) = 14
4 goes into 14 three times with two remainder.
So it doesn't go in evenly.
Let's try one more.
4 into 212334436
6 + (2 X 3) = 12
4 goes into 12 three times with 0 remainder.
Therefore 4 goes into 234436 evenly.
So what use is this trick to you?
Well if you have learnt the tutorial at Memorymentor.com 
about telling the day in any year, then you can use it in 
working out whether the year you are calculating is a leap year or not.

2. Multiplying by 12 - shortcut

So how does the 12's shortcut work?
Let's take a look.
12 X 7
The first thing is to always multiply the 1 of the twelve by the
number we are multiplying by, in this case 7. So 1 X 7 = 7.
Multiply this 7 by 10 giving 70. (Why? We are working with BASES here.
Bases are the fundamentals to easy calculations for all multiplication tables.

Now multiply the 7 by the 2 of twelve giving 14. Add this to 70 giving 84.
Therefore 7 X 12 = 84
Let's try another:
17 X 12
Remember, multiply the 17 by the 1 in 12 and multiply by 10
(Just add a zero to the end)
1 X 17 = 17, multiplied by 10 giving 170.
Multiply 17 by 2 giving 34.
Add 34 to 170 giving 204.
So 17 X 12 = 204
lets go one more
24 X 12
Multiply 24 X 1 = 24. Multiply by 10 giving 240.
Multiply 24 by 2 = 48. Add to 240 giving us 288
24 X 12 = 288 (these are Seriously Simple Sums to do aren't they?!)

3. Converting Kilos to pounds

In this section you will learn how to convert Kilos to Pounds, and Vice Versa.
Let's start off with looking at converting Kilos to pounds.
86 kilos into pounds:
Step one, multiply the kilos by TWO.
To do this, just double the kilos.
86 x 2 = 172
Step two, divide the answer by ten.
To do this, just put a decimal point one place in from the right.
172 / 10 = 17.2
Step three, add step two's answer to step one's answer.
172 + 17.2 = 189.2
86 Kilos = 189.2 pounds
Let's try: 
50 Kilos to pounds:
Step one, multiply the kilos by TWO.
To do this, just double the kilos.
50 x 2 = 100
Step two, divide the answer by ten.
To do this, just put a decimal point one place in from the right.
100/10 = 10
Step three, add step two's answer to step one's answer.
100 + 10 = 110
50 Kilos = 110 pounds

4. Adding Time

Here is a nice simple way to add hours and minutes together:
Let's add 1 hr and 35 minutes and 3 hr 55 minutes together.
What you do is this:
make the 1 hr 35 minutes into one number, which will give us 135 and do
the same for the other number, 3 hours 55 minutes, giving us 355
Now you want to add these two numbers together:
135
355
___ 
490
So we now have a sub total of 490.
What you need to do to this and all sub totals is
add the time constant of 40.
No matter what the hours and minutes are,
just add the 40 time constant to the sub total.
490 + 40 = 530
So we can now see our answer is 5 hrs and 30 minutes!

5. Temperature Conversions


This is a shortcut to convert Fahrenheit to Celsius and vice versa.
The answer you will get will not be an exact one, but it will
give you an idea of the temperature you are looking at. 
Fahrenheit to Celsius:
Take 30 away from the Fahrenheit, and then divide the answer by two.
This is your answer in Celsius.
Example:
74 Fahrenheit - 30 = 44. Then divide by two, 22 Celsius.
So 74 Fahrenheit = 22 Celsius.
Celsius to Fahrenheit just do the reverse:
Double it, and then add 30.
30 Celsius double it, is 60, then add 30 is 90
30 Celsius = 90 Fahrenheit
Remember, the answer is not exact but it gives you a rough idea.

6. Decimals Equivalents of Fractions

With a little practice, it's not hard to recall
the decimal equivalents of fractions up to 10/11!
First, there are 3 you should know already:
1/2 = .5
1/3 = .333...
1/4 = .25
Starting with the thirds, of which you already know one:
1/3 = .333...
2/3 = .666...
You also know 2 of the 4ths, as well, so there's only one new one to learn:
1/4 = .25
2/4 = 1/2 = .5
3/4 = .75
Fifths are very easy. Take the numerator (the number on top),
double it, and stick a decimal in front of it.
1/5 = .2
2/5 = .4
3/5 = .6
4/5 = .8
There are only two new decimal equivalents to learn with the 6ths:
1/6 = .1666...
2/6 = 1/3 = .333...
3/6 = 1/2 = .5
4/6 = 2/3 = .666...
5/6 = .8333...
What about 7ths? We'll come back to them
at the end. They're very unique.
8ths aren't that hard to learn, as they're just
smaller steps than 4ths. If you have trouble 
with any of the 8ths, find the nearest 4th,
and add .125 if needed:
1/8 = .125
2/8 = 1/4 = .25
3/8 = .375
4/8 = 1/2 = .5
5/8 = .625
6/8 = 3/4 = .75
7/8 = .875
9ths are almost too easy:
1/9 = .111...
2/9 = .222...
3/9 = .333...
4/9 = .444...
5/9 = .555...
6/9 = .666...
7/9 = .777...
8/9 = .888...
10ths are very easy, as well. 
Just put a decimal in front of the numerator:
1/10 = .1
2/10 = .2
3/10 = .3
4/10 = .4
5/10 = .5
6/10 = .6
7/10 = .7
8/10 = .8
9/10 = .9
Remember how easy 9ths were? 11th are easy in a similar way,
assuming you know your multiples of 9:
1/11 = .090909...
2/11 = .181818...
3/11 = .272727...
4/11 = .363636...
5/11 = .454545...
6/11 = .545454...
7/11 = .636363...
8/11 = .727272...
9/11 = .818181...
10/11 = .909090...
As long as you can remember the pattern for each fraction, it is
quite simple to work out the decimal place as far as you want
or need to go!
Oh, I almost forgot! We haven't done 7ths yet, have we?
One-seventh is an interesting number:
1/7 = .142857142857142857...
For now, just think of one-seventh as: .142857
See if you notice any pattern in the 7ths:
1/7 = .142857...
2/7 = .285714...
3/7 = .428571...
4/7 = .571428...
5/7 = .714285...
6/7 = .857142...
Notice that the 6 digits in the 7ths ALWAYS stay in the same
order and the starting digit is the only thing that changes!
If you know your multiples of 14 up to 6, it isn't difficult to,
work out where to begin the decimal number. Look at this:
For 1/7, think "1 * 14", giving us .14 as the starting point.
For 2/7, think "2 * 14", giving us .28 as the starting point.
For 3/7, think "3 * 14", giving us .42 as the starting point.
For 4/14, 5/14 and 6/14, you'll have to adjust upward by 1:
For 4/7, think "(4 * 14) + 1", giving us .57 as the starting point.
For 5/7, think "(5 * 14) + 1", giving us .71 as the starting point.
For 6/7, think "(6 * 14) + 1", giving us .85 as the starting point.
Practice these, and you'll have the decimal equivalents of
everything from 1/2 to 10/11 at your finger tips!
If you want to demonstrate this skill to other people, and you know
your multiplication tables up to the hundreds for each number 1-9, then give them a
calculator and ask for a 2-digit number (3-digit number, if you're up to it!) to be
divided by a 1-digit number.
If they give you 96 divided by 7, for example, you can think,
"Hmm... the closest multiple of 7 is 91, which is 13 * 7, with 5 left over. 
So the answer is 13 and 5/7, or: 13.7142857!"

7. Converting Kilometres to Miles


This is a useful method for when travelling between imperial
and metric countries and need to know what kilometres to miles are.
The formula to convert kilometres to miles is number of (kilometres / 8 ) X 5
So lets try 80 kilometres into miles
80/8 = 10
multiplied by 5 is 50 miles!
Another example
40 kilometres
40 / 8 = 5
5 X 5= 25 miles.

these are very few examples if you want to know more tricks you can comment for multiplication like multiply by 9 ,99,999  or multiply by 15,25,11 and so on. square, cube , root anything. enjoy.....